आज फिर सारी रात सो नही पाया,
उसके याद में बदलते करवीटे को रोक नही पाया
यू बिस्तीर के सिलवेटो में खुद को त्तन्हा पाया
और ये सोच आज फिर मैं सारी रात सो नही पाया....
क्यू अपने दिल को हर रोज़ तन्हा पाया
इन आँखो की नमी को भी तेरे नाम का पाया
हा है ये मुझे खबर की एक बेवफा से वफ़ा के उमिद पाया
ये सब जान कर भी मैं उसे भुला ना पाया
और फिर ये सोच मैं आज सारी रात सो नही पाया
उसके याद में बदलते करवीटे को रोक नही पायायू बिस्तीर के सिलवेटो में खुद को त्तन्हा पाया
और ये सोच आज फिर मैं सारी रात सो नही पाया....
क्यू अपने दिल को हर रोज़ तन्हा पाया
इन आँखो की नमी को भी तेरे नाम का पाया
हा है ये मुझे खबर की एक बेवफा से वफ़ा के उमिद पाया
ये सब जान कर भी मैं उसे भुला ना पाया
और फिर ये सोच मैं आज सारी रात सो नही पाया