Friday, March 25, 2011

सारी रात सो नही पाया

आज फिर सारी रात सो नही पाया,
उसके याद में बदलते करवीटे को रोक नही पाया
यू बिस्तीर के सिलवेटो में खुद को त्तन्हा पाया
और ये सोच आज फिर मैं सारी रात सो नही पाया....

       क्यू अपने दिल को हर रोज़ तन्हा पाया
       इन आँखो की नमी को भी तेरे नाम का पाया
       हा है ये मुझे खबर की एक बेवफा से वफ़ा के उमिद पाया
       ये सब जान कर भी मैं उसे भुला ना पाया
       और फिर ये सोच मैं आज सारी रात सो नही पाया

       
       
     

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