Monday, April 15, 2013

मैं तो महज एक बच्चा था!!!

ए खुदा

मैं तो महज एक बच्चा था

एक घरोंदे का छोटा सा हिस्सा था

बाकी था ज़िंदगी का एक लंबा सफ़र

जिस में मा का ही एक सहारा था…

अभी तक तो लोरिया भी नई सुन पाया था

अपने लडखड़ते कदम को कहा संभाल पाया था

कहा देखा था ज़िंदगी के ख़ुसीयो का सफ़र

कहा उसके हांतो से दो नीवाला खाना का खाया था

ए खुदा

मैं तो महज एक बच्चा था

एक घरोंदे का छोटा सा हिस्सा था……………


ए खुदा

अभी तक तो ये भी ना समझ पाया था

उसके आँचल में दो प्ला भी ना रह पाया था

सब्द ही कहा सीखे थे अभी बोलने को मैने

वो तो मा थी जिसने इस हालत में भी संभलना सिखाया था

मैने तो महज एक बच्चा था

एक घरोंदे का छोटा सा हिस्सा था……


क्या गुनहा कि थी मैने

खुदा जिसकी सज़ा तूने दी है

लोरिया, खुशिया और सहारा सब मुझे छीन ली है

कर दिया एसे हालात में जहा सिर्फ़ अकेली ज़िंदगी है

एक मा थी प्यारी मेरी…

जिसे तुमने मुझसे छीन ली है

ए खुदा सिर्फ़ इतना बता दे

मुझे कौन से गुनहा की सज़ा दी है..

मैने तो महज एक बाचा था……..


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