Sunday, October 16, 2011

वो कहती है सुनो जाना

वो कहती है सुनो जाना 
हमारी दुरी कही हमारे प्यार को कम न कर दे
मैं कहता हु ये दूरिया जो है वो हमरे प्यार को छु भी नहीं सकती है 
क्या मैं अपनी सांसो को खुद से अलग रख सकता हू.....



  वो कहती है कब तक मुझे अपनी  सांसे बना कर रखोगे 
  क्या तुम हर जनम मुझे एसे ही चाहोगे 
  मैं कहता हू, इस बात पर कभी  सोचा  नहीं 
  सोचु  तो जैसे सांसे अब ही थमने लगती है 

वो कहती है तुम क्यों मुझे इतना चाहते हो 
क्या मैं कोई सहजादी हु
मैं कहता हु मेरी नज़र से कभी खुद को देखो 
तुम्हे मालूम हो जाएगा  

  वो कहती है तुम्हारी ये बाते ही मुझे बहुत सताती है 
  की मैं तुम्हारे बिना कभी खुद को सूच ना पाऊँगी 
  मैं कहता हु की  मेरी ये बाते तुम्हारे साथ ही रहेगी 
  की मुझे कोई और गवारा नहीं है.
  की जब तक मेरी ये ज़िन्दगी है  तुम मेरी ही सांसे रहोगी 
  की  मैंने बिन सांसो के जीना कभी सोचा  नहीं है...

वो कहती है की  कभी खुदा ने तुम्हे मुझसे जुदा करने की कोसिस की 
तो क्या तुम मुझे जुदा हो जाओगे 
मैं कहता हु तुम मेरी दुआ हो मेरी इबादत हो 
की खुदा कभी दमन खाली नहीं करता 

  वो कहती है की मुझे इस प्यार में कभी दर्द ना देना 
  की मैं ये दर्द सह ना पाऊँगी 
  मैं कहता हु सुनो जाना 
  की  प्यार और दर्द का रिश्ता बहुत  पुराना है 
  लेकिन ये भी सच है की हर दर्द की दवा प्यार होती है 
  की तुम्हारे लिए मेरा प्यार कभी कम हो नहीं सकता........

वो कहती है की आपकी ये ही बाते मुझे बहुत सताती है
की आप बिन जीना मुझे कभी गवारा नहीं होगा.........

  वो कहती हा सुनो जाना 
हमारी दुरी कही हमारे प्यार को कम न कर दे....................
  

  


Thursday, September 15, 2011

बात कई साल पुरानी थी

ये एक छोटी सी कहानी थी
बात कई साल पुरानी थी.
एक सपना था संजोया, मैं राजा और वो एक रानी थी
ये एक छोटी सी कहानी थी बात कई साल पुरानी थी...

      था ख़ुसीयो के आँगन में एक घर
      और वादियो का वहा बसेरा था
      थी हर एक ओर हमारे प्यार से रोशन
      गम का दूर तक था ना कोई अंधेरा
      ये एक छोटी सी कहानी थी
       बात कई साल पुरानी थी ..........

लिए थे कसमे जीने मरने की
हर गम से साथ गुजरने की
फिर क्यू जो एक गम छाया
तो टूट गए रिश्ते सुबहा के सपनो सी
बात कई साल पुरानी थी
ये एक छोटी सी कहानी थी...........

   गुज़ारते गुज़ारते कई साल गुज़ार दिए
   उसकी हर एक यादे मिटा दिए
   भुला दिया उसके हर एक कसमो को
   फिर भी कभी दिल से ना भुला पाया 

      फिर क्यू आज उसकी याद ने दिल को इतना सताया
      यू पलको पे आंसू और गम का बादल छाया
      क्यू लगा फिर से दिल पर उसका बसेरा हो जाए
      उसकी यादो से फिर एक नया सवेरा हो जाए
      मिट जाए दोनो की ये दूरिया
      और उन सपनो के साथ फिर एक घरोंदा सज जाए

 मैं एक राजा और वो एक रानी थी
 ये एक छोटी सी कहानी थी
 बात कई साल पुरानी थी.........

                                               You r always in my heart
                                                                "Think we dream so we don't have to be away from one another. If we're in each other's dreams, we'll always be together. Since I can't be with you right now, I will have to be content just dreaming about when we will be together again."
                                                                       

Thursday, September 8, 2011

ये एक छोटी सी कहानी थी

ये एक छोटी सी कहानी थी..
मेरा दिल था एक घरौंदा और वो उस घरोंदे की रानी थी
एक वक़्त था वो जब वहा सिर्फ़ खुशाली थी..
आज वाहा सिर्फ़ मेरी तन्हाई और उसकी परछाई से आनी थी....
ये एक छोटी सी कहानी थी..
मेरा दिल था एक घरौंदा और वो उस घरोंदे की रानी थी.............

Wednesday, April 27, 2011

काश वो अपना बीता बचपन ले आउ

काश मेरा वो बचपन लॉट आए..
समुंदर के साहिल पर रेत का फिर महल बनाए ..
काश मेरा वो बचपन लॉट आए....
.
 
               काश अपने घरौंदे के झूले में फिर से झूलता रहू
              काश मा की लोरियो से रात को सोता राहू
              काश खाब में हर रोज एक नए सपने संजोता रहू 
             काश वो अपना बीता बचपन ले आउ


काश फिर कंधो पर किताबो के बोझ ले
पापा की उंगलिया पक़ड़ कर स्कूल जाउ 
काश अपनी हरकतो से फिर से घर में हलचल मचाउ
फिर मा की डाट से गुम सूम कीसी कोने में छुप जाउ
काश अपना वो  बीता बचपन ले आउ................

Tuesday, April 19, 2011

है तेरे दर्द का एहसास मुझे भी

ना कर मुझे इतना  बेबस और लाचार
है तेरे दर्द का एहसास मुझे भी
कट रही होगी ज़िंदगी कैसी        
है इस बात का  अंदाज़ मुझे भी
   
      ना शिकायत कर सकता खुदा से
     ना दे सकता बेवफा नाम तुझे                       
      ये ज़िंदगी किस मोड़ पर ला खड़ी कर गई
        ना पा सकता तुझे ना खो सकता कभी



ना गम है मुझे मेरे गम का
मैं तेरा गम सोच डर जाउ
मैं तो जी लु भरी आंसू मे
पर तेरे आंसू देख मर जाउ

     ना कर मुझे इतना  बेबस और लाचार
     है तेरे दर्द का एहसास मुझे भी....................








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Wednesday, April 6, 2011

वो किसी और की

कल रात मैने एक सवपन देखा.
सवपन क़ाबिले गोर था.
उसके हॅंतो में थी मेहन्दी लगी.
मेरे भी सेर मौर् था.
मंडप था पूरा सॅजा हुआ सब कुछ वाहा बतोर था.       
सुबहा तलक जब आँखें खोली नज़ारा ही कुछ और था.
मेरा प्यार था जो उसका प्यार कोई और था.
दिल पया किसी और ने था , दिल खोया कोई और था.
वो प्याली थी किसी और की.............
पीने वाला कोई और था..
कल रात मैने एक सवपन देखा
सवपन क़ाबिले गोर था..................

कुछ रिश्ते भी अजीब होते है

कुछ रिश्ते भी अजीब होते है
ना चाह कर भी हम एक डोर में उलझे होते है
जी करता है कभी आज़ाद पंछी की तरह तोड दु  इस डोर को
एक झुकते डाली से उठ कर बैठ जाउ किसी और को
क्यू उलझन में रह जाती है ज़िंदगी  इतनी
ना उड़ सका उस डाली से
 ना सुलझा पाया उस डोर को
क्यूँ कुछ रिश्ते भी अजीब होते है


           यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश  पंछी की तरह पिंजरे में
           एस बंद पिंजरे से मिल जाए उसे खुशी यह सिलसिला है मेरे जीने में
           यू एक बूँद पानी से मिटा कर अपनी प्यास
            फिर रम जाता हूँ इसी सिलसिले में
           यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश  पंछी की तरह पिंजरे में


 

Friday, March 25, 2011

सारी रात सो नही पाया

आज फिर सारी रात सो नही पाया,
उसके याद में बदलते करवीटे को रोक नही पाया
यू बिस्तीर के सिलवेटो में खुद को त्तन्हा पाया
और ये सोच आज फिर मैं सारी रात सो नही पाया....

       क्यू अपने दिल को हर रोज़ तन्हा पाया
       इन आँखो की नमी को भी तेरे नाम का पाया
       हा है ये मुझे खबर की एक बेवफा से वफ़ा के उमिद पाया
       ये सब जान कर भी मैं उसे भुला ना पाया
       और फिर ये सोच मैं आज सारी रात सो नही पाया

       
       
     

Wednesday, January 5, 2011

ज़िंदगी में कुछ रिश्ते

ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा.
फिर भी हम अन रिश्तो को पाने के खातिर पूरे उमर जी जाते हा..
जब कम लगती हा ये ज़िंदगी तो हम
खुदा से एक और ज़िंदगी माँग लेते हे..
ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा.
      
             उलझे रहते हे हम उन रिश्तो में
             जिनके लकीरे हमारे हाथो में नही होती
             फिर भी बनाने को उन लकीरो को
             खुदा से हर रोज़ एक नये लकीर की दुआ करते हे
             ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा................

ज़िंदगी में कुछ रिश्ते

ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा.
फिर भी हम अन रिश्तो को पाने के खातिर पूरे उमर जी जाते हा..
जब कम लगती हा ये ज़िंदगी तो हम
खुदा से एक और ज़िंदगी माँग लेते हे..
ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा.
      
             उलझे रहते हे हम उन रिश्तो में
             जिनके लकीरे हमारे हाथो में नही होती
             फिर भी बनाने को उन लकीरो को
             खुदा से हर रोज़ एक नये लकीर की दुआ करते हे
             ज़िंदगी में कुछ रिश्ते अक्सर छूट जाते हा................