Wednesday, April 27, 2011

काश वो अपना बीता बचपन ले आउ

काश मेरा वो बचपन लॉट आए..
समुंदर के साहिल पर रेत का फिर महल बनाए ..
काश मेरा वो बचपन लॉट आए....
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               काश अपने घरौंदे के झूले में फिर से झूलता रहू
              काश मा की लोरियो से रात को सोता राहू
              काश खाब में हर रोज एक नए सपने संजोता रहू 
             काश वो अपना बीता बचपन ले आउ


काश फिर कंधो पर किताबो के बोझ ले
पापा की उंगलिया पक़ड़ कर स्कूल जाउ 
काश अपनी हरकतो से फिर से घर में हलचल मचाउ
फिर मा की डाट से गुम सूम कीसी कोने में छुप जाउ
काश अपना वो  बीता बचपन ले आउ................

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