Wednesday, April 6, 2011

वो किसी और की

कल रात मैने एक सवपन देखा.
सवपन क़ाबिले गोर था.
उसके हॅंतो में थी मेहन्दी लगी.
मेरे भी सेर मौर् था.
मंडप था पूरा सॅजा हुआ सब कुछ वाहा बतोर था.       
सुबहा तलक जब आँखें खोली नज़ारा ही कुछ और था.
मेरा प्यार था जो उसका प्यार कोई और था.
दिल पया किसी और ने था , दिल खोया कोई और था.
वो प्याली थी किसी और की.............
पीने वाला कोई और था..
कल रात मैने एक सवपन देखा
सवपन क़ाबिले गोर था..................

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