कुछ रिश्ते भी अजीब होते है
ना चाह कर भी हम एक डोर में उलझे होते है
जी करता है कभी आज़ाद पंछी की तरह तोड दु इस डोर को
एक झुकते डाली से उठ कर बैठ जाउ किसी और को
क्यू उलझन में रह जाती है ज़िंदगी इतनी
ना उड़ सका उस डाली से
ना सुलझा पाया उस डोर को
क्यूँ कुछ रिश्ते भी अजीब होते है
यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश पंछी की तरह पिंजरे में
एस बंद पिंजरे से मिल जाए उसे खुशी यह सिलसिला है मेरे जीने में
यू एक बूँद पानी से मिटा कर अपनी प्यास
फिर रम जाता हूँ इसी सिलसिले में
यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश पंछी की तरह पिंजरे में
ना चाह कर भी हम एक डोर में उलझे होते है
जी करता है कभी आज़ाद पंछी की तरह तोड दु इस डोर को
एक झुकते डाली से उठ कर बैठ जाउ किसी और को
क्यू उलझन में रह जाती है ज़िंदगी इतनी
ना उड़ सका उस डाली से
ना सुलझा पाया उस डोर को
क्यूँ कुछ रिश्ते भी अजीब होते है
यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश पंछी की तरह पिंजरे में
एस बंद पिंजरे से मिल जाए उसे खुशी यह सिलसिला है मेरे जीने में
यू एक बूँद पानी से मिटा कर अपनी प्यास
फिर रम जाता हूँ इसी सिलसिले में
यू कट जाती है ज़िंदगी एक बेवश पंछी की तरह पिंजरे में

wahhhhh sahi... jiyo....
ReplyDeleteu r impossible.............
ReplyDelete......................juss wow...
wowwwwwwwwwwwwwwwwww
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